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Mobile Phone Repairing Career, Jobs, Scopes in Hindi


मोबाइल फोन रिपेयरिंग में कैरियर, रोजगार व अवसरो की संभावानायें 
Mobile Phone Repairing Career, Jobs, Scopes in Hindi
मोबाइल फोन आज हर व्यक्ति की जरूरत बन गई है। इन दिनों कई मोबाइन कंपनियों के आने से यह पता नहीं चलता कि कौन सा मोबाइल लेना चाहिए या नहीं। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार आज मोबाइल उद्योग एक उभरता हुआ क्षेत्र है और पिछले पांच वर्षों में 95 प्रतिशत भारतीयों के पास अपने मोबाइल फोन हैं। जो लोग महंगे मोबाइल फोन खरीदते हैं, वे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश में होते हैं, जो उनके फोन को अच्छी प्रकार से देख सके। यदि आजकल के युवा मोबाइल रिपेयरिंग में कैरियर बनाना चाहें, तो भारत में स्थित टेक्निकल उद्योगों में वे बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इसमें किसी खास अनुभव या किसी डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है।
कोई व्यक्ति यदि अपने व्यापार से खुश नहीं है और ज्यादा कमाई करना चाहता है, तो वह इस क्षेत्र में 20000 से 50000 रुपए प्रति महीना आसानी से कमा सकता है। मोबाइल रिपेयरिंग के कोर्स करके आप एक अच्छा कैरियर, स्थिरता, प्रतिष्ठा और अच्छी कमाई कर सकते हैं। वर्तमान में मोबाइल रिपेयरिंग एक उभरता हुआ कैरियर है। भारत में एक इंटरनेशनल कंपनी एक दिन में लगभग 35000 मोबाइल बेचती है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस क्षेत्र में कैरियर बनाना कितना फायदेमंद है। अगर मोबाइल सेट्स को रिपेयर करने का हुनर आप में हो तो इसे रोजगार का अच्छा जरिया बनाया जा सकता है। शिक्षित बेरोजगार युवकों  के लिए आज के परिवेश में मोबाइल,सेटेलाइट फोन,लैंडलाइन फोन, मोबाइल चार्जर आदि इलेक्ट्रानिक सामानों का मैकेनिक बनकर स्वरोजगार स्थापित करने का अच्छा अवसर है।

 
खास बात यह है कि इस उद्यम को शुरू करने में बहुत पैसे की जरूरत भी नहीं पड़ती है जबकि यह फायदा बहुत देता है। इसे सीखने में भी बहुत समय नहीं लगता, लेकिन यह जरूरी है व्यक्ति का रूझान उस तरफ हो। कुछ लोग पढ़ने में अच्छे होते हैं और उसी के बल पर अपनी मंजिल हासिल कर लेते हैं तो कुछ पढ़ने में भले ही औसत दर्जे के हों,पर हाथ के हुनर के बल पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले जाते हैं। मोबाइल रिपेयरिंग एक ऐसा ही हुनर है, जिसे सीख कर चाहें तो कहीं नौकरी कर लें या फिर स्वरोजगार शुरू कर दूसरों को नौकरी दें। जन संचार का माध्यम होने के कारण करीब 90 से 98 प्रतिशत लोगों की जरूरत बन चुका मोबाइल अब रोजगार के नए-नए अवसरों का जरिया भी बन गया है। मोबाइल रिपेयरिंग भी इन्हीं में से एक है। आप मोबाइल रिपेयरिंग को सफल स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं। वैसे तो आप इस काम को मोबाइल मैकेनिक रख कर भी कर सकते हैं, मगर सफल स्वरोजगार के लिए आप स्वयं प्रशिक्षण लें तो बेहतर होगा। 
 
मोबाइल से संबंधित यूं तो बहुत से काम हैं, जिनमें आप करियर बना सकते हैं, लेकिन मोबाइल रिपेयरिंग एक ऐसा काम है, जो कम से कम खर्चे पर स्वरोजगार स्थापित करने में मदद तो करता ही है, साथ ही अच्छी कमाई का भी जरिया बन जाता है। स्वरोजगार की दृष्टि से तो मोबाइल रिपेयरिंग का काम बहुत ही अच्छा है। जब कोई मोबाइल मैकेनिक कहीं नौकरी करता है तो एक लिमिट तक ही उसे वेतन मिलेगा, लेकिन जब वह अपना काम करेगा तो अनलिमिटेड कमा सकता है। यही नहीं, इसमें एक फायदा यह है कि कोई भी व्यक्ति जो कम पढ़ा-लिखा यानी केवल आठवीं पास हो, इस काम को कर सकता है।
इसके अलावा कम पूंजी लगा कर इस काम को किया जा सकता है। कभी भी कर सकते हैं मोबाइल रिपेयरिंग कोर्स आजकल बच्चे ट्रेडिशनल कोर्स की बजाय वोकेशनल और टेक्निकल कोर्स में ज्यादा रुचि ले रहे हैं. ऐसे कोर्सेज का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इनमें आपको पैसे और टाइम दोनों कम इन्वेस्ट करना होता है, जबकि कमाई अच्छी होती है. इन दिनों मोबाइल रिपेयरिंग का कोर्स फेमस हो रहा है. कई बच्चे इस कोर्स में इंटरेस्ट ले रहे हैं. यह न तो कोई डिग्री कोर्स होता है और न ही डिप्लोमा. इसके लिए आपको किसी भी मोबाइल फोन रिपेयरिंग सीखाने वालें इंस्टीयुट में महज चार से छह महीने देने होते हैं. इसे करने के लिए 7000 से 22000 रुपये फीस लगते हैं.
अगर आप एक अच्छा मोबाइल रिपेयरिंग मैन बन जाते हैं तो शुरु में हर महीने कम-से-कम 15,000 से 20,000 रुपये कमा सकते हैं. और जहां तक बात है स्कोप की तो सभी जानते हैं कि मोबाइल का मार्केट इन दिनों बूम पर है तो जाहिर सी बात है कि रिपेयरिंग का काम भी हमेशा बूम पर ही रहेगा. ऐसे में इस कोर्स को करने के बाद अपने फ्यूचर को नया सेप दे सकते हैं. मोबाइल की तकनीक पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत होती है और कम्प्यूटर हार्डवेयर की तरह ही इसके उपकरण भी होते हैं। इसके बढते उपयोग को देखते हुए इसके रख-रखाव, रिपेयरिंगअसेंबलिंगसॉफ्टवेयर लोडिंग, वायरस रिमूव करने, मोबाइल अपग्रेड करने, पासवर्ड ब्रेक, रींइंस्टॉलसेल-परचेज आदि के क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। हालांकि भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में बडे बाजार को देखते हुए मल्टीनेशनल कंपनियां तक इस क्षेत्र में कूद पडी हैं और आकर्षक सैलरी पर जॉब ऑफर कर रही हैं।

दुकान खोलें या मोबाइल रिपेयरिंग सेंटरों  में नौकरी पर जायें :  पूरी तरह प्रशिक्षण प्राप्त कर लेने के बाद आप अपने क्षेत्र के किसी भी जगह पर मोबाइल,सेटेलाइट फोन,मोबाइल चार्जर आदि इलेक्ट्रानिक सामानों की मरम्मत की दुकान प्रारंभ कर सकते हैं। दुकान खोलने में भी बड़ी लागत नहीं आती। बस मोटा खर्चा जगह का होता है जो वह अपने बजट के अनुसार खरीदे या किराये पर ले लें। प्रारंभ में इसके लिए कुछ जरूरी सामानों जैसे टूल्स और स्पेयर जो 5 से 10 हजार में  आसानी से आ जाते हैं, का क्रय करना आवश्यक है ताकि मरम्मत का काम सुचारु रूप से चल सके।  आवश्यक सामानों में छोटे-बड़े पेचकस, प्लास,सोल्डर, कटर, डिजिटल मल्टीमीटर,सोल्डरिंग आयरन,चिमटा आदि होंगे जो लगभग 1 हजार रुपये से 2 हजार रुपये में क्रय किये जा सकते हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक पार्टस,टेबल-कुर्सी   आदि की भी जरूरत होगी। यूं तो पार्टस में पूंजी लगाने से तीन गुना लाभ मिल जाता है।

जो स्पेयर या पाट्र्स मोबाइल में लगते हैं वे सामान्यता अपने शहर की लोकल और थोक मार्केट से ही खरीदे जा सकते हैं जिनमें अच्छी कमायी है। व्यक्ति ज्यादा सामान खरीदकर वैसे भी नहीं रखता क्योंकि हर मोबाइल की जरूरत अलग-अलग होती है और जरूरत पडऩे पर ही सामान लिया जाता है। कोर्स करने के बाद आप पूंजी लगाकर अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं या फिर मोबाइल रिपेयरिंग सेंटरों में नौकरी कर सकते हैं। मोबाइल मैकेनिक के तौर पर आपको अच्छा वेतन आसानी से प्राप्त हो सकता है। आप प्रतिदिन आसानी से 500 से 1500 रुपये कमा सकते हैं। मोबाइल सेंटरों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।
पब्लिसिटी जरूरी है : इस काम की मुख्य जरूरत है पब्लिसिटी यानी प्रचार। आपका काम अच्छा होगा, तो कस्टमर में विश्वास बढ़ेगा और वे आपके पास आयेंगे ही। साथ ही अपने विजिटिंग कार्डस छपवा लें और जो भी कस्टमर आये मोबाइल  रिपेयरिंग कराने के लिए उन्हें अपना कार्ड दे दें। अपने दोस्तों, मोहल्ले, रिश्तेदार, पड़ोस हर जगह अपने कार्ड बंटवाएं।

हालांकि एक बार जब आप अच्छा काम देते हैं तो लोग खुद ही दस जगह आपकी चर्चा करते हैं। फिर भी इस बिजनेस में लिंक बनाना बहुत जरूरी होता है। काम धीरे-धीरे ही मिलता है, पर एक बार लय बन जाने के बाद और स्थापित हो जाने के बाद काम की कमी नहीं होती। हालांकि इसमें आपके प्रदर्शन का भी महत्वपूर्ण रोल होता है। समय पर सर्विसेस  देना,सही चार्ज लेना जैसी चीजें बहुत अहम होती हैं। मोबाइल मैकेनिक की सफलता उसकी व्यवहार कुशलता, सम्पर्क क्षमता और निश्चित समय पर संतोषजनक काम निपटा देने जैसे व्यावसायिक गुणों पर ही अधिक निर्भर करती है।

स्थापित हो जाने के बाद मोबाइल रिपेयरिंग में अच्छी कमायी है। शुरू-शुरू में थोड़ा संघर्ष करना पड़  सकता है। आजकल मोबाइल रिपेयरिंग बढ़ती मांग और इसके मरम्मत का काम लेकर मोबाइल मैकेनिक का व्यवसाय काफी लाभकारी हो गया है।  शहर  हो या गांव, मोबाइल मैकेनिक  की जरूरत लोगों के लिए  आवश्यक हो गई है। मरम्मत के लिए बदले जाने वाले पाट्र्स भी अब  अधिकांश दुकानों में उपलब्ध होने से इन्हें रखने के लिए मैकेनिक को अतिरिक्त पूंजी की भी जरूरत नहीं होती है।मोबाइल फोन के अधिकतर प्रयोग और नए मॉडल्स के आने से इसके ग्राहकों में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है। इसीलिए मोबाइल रिपेयरिंग में रोजगार के अवसरों में वृद्धि देखने को मिलती है। भारत में मोबाइल इंडस्ट्री ने अच्छा-खासा विकास किया है। इसके चलते इसमें रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई है। इस क्षेत्र में रोजगार के अच्छे अवसर हैं। यदि आप इस क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतर कैरियर साबित हो सकता है।
मोबाइल रिपेयरिंग में ट्रेनिंग करके आप बड़ी-बड़ी कंपनियों या एक फ्रीलांसर के रूप में या अपना व्यापार भी कर सकते हैं। यदि आप मोबाइल इंजीनियर बनकर अपना काम शुरू करते हैं, तो आपको रिपेयरिंग के अतिरिक्त निम्न तरीके और भी लाभान्वित करेंगेः आप बड़ी दुकान खोलकर मोबाइल स्पेयर पार्ट्स भी बेच सकते हैं, पुराने मोबाइल ठीक करके उनसे भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से मोबाइल रिपेयरिंग की ट्रेनिंग लेकर भारत में स्थित मोबाइल कंपनियों में बेहतर रोजगार तलाश सकते हैं। इसके अलावा आप अध्यापन के क्षेत्र में भी नौकरी प्राप्त कर सकते हैं।
आजकल मोबाइल कंपनियां और डीलर्ज इस प्रतियोगिता भरे क्षेत्र में योग्य मोबाइल रिपेयरर और इंजीनियरों को नौकरी प्रदान करते हैं और योग्यतानुसार अच्छा वेतनमान भी प्रदान करते हैं। हमारे देश में आज हर आदमी के हाथ में मोबाइल दिखने लगा है। जब मोबाइल है तो खराब भी होगा और खराब होगा तो उसे संभालने के लिए मैकेनिक भी चाहिए। ऐसे में मोबाइल रिपेयरिंग आय का एक अच्छा जरिया बनता जा रहा है, जो आगे बढ़ता ही जाएगा। जन संचार का माध्यम होने के कारण लगभग 90 से 98 प्रतिशत लोग मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में आप मोबाइल रिपेयरिंग को सफल स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं। यूं तो आप इस काम को करने के लिए मोबाइल रिपेयरिंग इंजीनियर भी रख सकते हैं, लेकिन सफल स्वरोजगार के लिए आपको स्वयं ट्रेनिंग लेना आवश्यक हो जाता है। शॉप के खर्च को छोड़कर आप इस काम को पांच से दस हजार रुपए मात्र में शुरू कर सकते हैं, मोबाइल रिपेयरिंग का कोर्स करने के बाद आप अपनी शॉप खोलकर बीस से पच्चीस हजार रुपए हर महीना कमा सकते हैं। मोबाइल इंजीनियर बनने के लिए आपको किसी अच्छे ट्रेनिंग सेंटर का चुनाव कर उसमें प्रवेश लेना पड़ेगा।
यदि आप आठ-दस कक्षा तक पढ़े-लिखे भी हैं, तो आप आसानी से सफल मोबाइल इंजीनियर बन सकते हैं यदि आपको कम्प्यूटर की बेसिक नॉलेज है, तो और भी अच्छा है। कम्प्यूटर द्वारा यह कोर्स कराने वाले संस्थान दस से पचास हजार रुपए तक फीस लेते हैं। यदि आप मोबाइल इंजीनियर बनकर अपना काम शुरू करते हैं, तो आपको रिपेयरिंग के अतिरिक्त निम्न तरीके और भी लाभान्वित करेंगेः आप बड़ी दुकान खोलकर मोबाइल स्पेयर पार्ट्स भी बेच सकते हैं, पुराने मोबाइल ठीक करके उनसे भी अच्छी कमाई कर सकते हैं।

कमाई -मोबाइल रिपेयरिंग के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। इसमें एक व्यक्ति निजी कंपनी में 20000 से 30000 रुपए प्रति महीना आसानी से कमा सकता है। इसके अलावा मोबाइल रिपेयरिंग का कोर्स करने के बाद आप अपनी दुकान खोलकर 20 से 50 हजार रुपए हर महीना कमा सकते हैं। अनुभव के साथ आय में भी इजाफा तय है। मोबाइल रिपेयरिंग के काम में आप बीस से पचास हजार रुपए प्रतिमाह तक कमा सकते हैं। यह आपके काम, जगह के चुनाव और ग्राहकों की तादाद पर निर्भर करेगा।

शैक्षणिक योग्यता - मोबाइल रिपेयरिंग का कोर्स आठवीं पास से लेकर ग्रेजुएट और बीटेक भी अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकते हैं।

सीखने की फीस  बेसिक मोबाइल फोन रिपेयरिंग कोर्स सीखने के लियें 8 से 22 हजार रुपयें तक फीस लगती है । यह फीस इंस्टीटयुट की लोकेशन पर निर्भर करती है ।
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